हमारे सिटिवाले पड़ोसी मिट्ठू मिया के बारे में हम पहले बता चुके है | वक़्त के साथ पहचान अब याराने में बदल चुकी है | जब भी हम घर पर होते है, जनाब हमारे यहा आने की जिद्द करके चले आते है | खाना पीना, कभी … more →
mehekmehhekk wrote 2 days ago: हमारे सिटिवाले पड़ोसी मिट्ठू मिया के बारे में हम पहले बता चुके है | वक़्त के साथ पहचान अब याराने में … more →
mehhekk wrote 3 weeks ago: हिन्दी बोलिये और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाइए | कुछ ही दिन पहले एक मराठी पेपर में पढ़ा था , के हिन्दी … more →
mehhekk wrote 1 month ago: बहुत दिनो बाद, शायद बहुत सालों बाद किसी ने घर पर खेत के गन्ने भेजे | गन्ने हो और मुह में पानी ना आए, … more →
mehhekk wrote 2 months ago: सवेरे सवेरे इन बॉक्स में आया एक मेसेज | बी नाइस , स्माइल एट अदर्स | दूसरों के साथ हमेशा अच्छा बर्ताव … more →
mehhekk wrote 2 months ago: कुछ दिन पहले बाजुवाले बंगले में नये लोग आए रहने के लिए | अब जैसा की होता है , उनसे जान पहचान के लिए … more →
mehhekk wrote 3 months ago: बाज़ार बहुत होते है, मगर मीना बाज़ार की अपनी ही खासियत होती है | हर साल रमज़ान के महीने में लगता है … more →
mehhekk wrote 3 months ago: कुछ दिन पहले टीवी पर एक फिल्म देखी , सज़ा-ए-कालापानी , शायद उस वक़्त की थी जब वीर सावरकर जी भी वहा र … more →
mehhekk wrote 3 months ago: सभी कहते है और अक्सर पढ़ा भी है,कोशिश करते रहो,हार नही होती , कोई कोशिश बेकार नही होती| अजी हम कहते … more →
mehhekk wrote 4 months ago: आधी रात के उपर हुआ है | अब भोर ही होनेवाली है समझो | मन सोने को तैयार नही | उसके अंदर देशभक्ति का जज … more →
mehhekk wrote 4 months ago: कभी सोचा न था, जिन निगाहों ने तुम्हारे साथ सारी उमर बिताने के ख्वाब देखे , उन्ही निगाहों से तुम्हे द … more →
mehhekk wrote 8 months ago: आज की सुबह बड़ी सुहानी रही | बादलों का झुंड आसमान पर पेंडुलम सा झूलता रहा | ठंडी ठंडी हवाओ का घर की … more →
mehhekk wrote 10 months ago: वैसे तो जब भी हमे अपने पेशेंट और ड्यूटी से फुर्सात मिलतीं है,हम टीवी से चिपक जाते है | ख़ास कर कलर्स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुंबई में जो कूछ हुआ उसका असर हर दिल पर हुआ | और हमे लग रहा था एक हम ही बेशरम है जो इसे रुटीन हादस … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कल रात जल्दी सो गये थे हम | मुंबई में हुए हादसों के बारे में कोई खबर ही नही थी | जब सुभह उठे तो मों … more →
mehhekk wrote 1 year ago: वॉचमन हमारे गुलाब के पौधे को काफ़ी दीनो बाद खूबसूरतसा गुलाब खिला | केसरिया रंग का ,बड़ी बड़ी पंखुड़ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कुछ पुराना सा वाकीया है,बहुत पुराना भी नही २ या ३ साल पहले का होगा | जब हम और हमारी दो सहेलियाँ मुंब … more →
mehhekk wrote 1 year ago: टेलीपथी कितनी खुशी होती है जब हम किसी को याद करे और वही शक्स नज़रों के सामने हो | हम किसी के बारे म … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ’महावीर‘ ब्लॉग ( http://mahavir.wordpress.com ) पर १५ जुलाई २००८ के मुशायरे/कवि सम्मेल … more →
mehhekk wrote 1 year ago: निशा की चादर का मोड़ कर किनारा नभ के आंगन में खिला उजियारा आस्था के फूल करूँ ईश्वर को अर्पित कमजोर घ … more →