याद आती हैं फिर वह तारीख़ें मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें लिखना पुराने ख़तों को दोबारा पूछना क्या नाम है तुम्हारा कुछ न मिले ऐसी शाम के तले इतना मान ले इतना जान ले वह साँसों का साँसों तक जाना क़रीब आकर फि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रwrote 1 year ago: याद आती हैं फिर वह तारीख़ें मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें लिखना पुराने ख़तों को दोबारा पूछना क्या नाम ह … more →