अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य ! तुम्हारे बस की नहीं उस अविवेक पर विजय जिसके दस बीस नहीं … more →
समाजवादी जनपरिषदअफ़लातून wrote 7 months ago: अयोध्या , १९९२ हे राम , जीवन एक कटु यथार्थ है और तुम एक महाकव्य ! तुम्हारे बस की … more →
अफ़लातून wrote 7 months ago: जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी … more →
अफ़लातून wrote 12 months ago: अजीब वक्त है - बिना लड़े ही एक देश- का देश स्वीकार करता चला जाता अपनी ही तुच्छताओं के अधीनता ! कुछ … more →
अफ़लातून wrote 12 months ago: प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने … more →