पिछले दिनों मैं महाकवि कालिदास कृत “मेघदूत” पढ रहा था. उसे पढकर मेरे अन्दर का लेखक अँगडाईयाँ लेने लगा. और प्यार-मुहब्बत पर कुछ लिखने की ठानी. कल दोपहर को वर्षा ऋतू अपने यौवन पर थी तो मन मे… more →
यह भी खूब रहीambuj wrote 8 months ago: कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब … more →
pryas wrote 1 year ago: पिछले दिनों मैं महाकवि कालिदास कृत “मेघदूत” पढ रहा था. उसे पढकर मेरे अन्दर का लेखक अँगडा … more →