रुको कविता रुको समाज, सामाजिकता रुको रुको जन, रुको मन। रुको सोच सौंदर्य रुको ठीक इस क्षण इस पल इस वक्त उठना है हाथ में लेना है झाड़ू करनी है सफाई दराजों की दीवारों की रसोई गुसल आँगन की दरवाजों की कथन … more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 3 months ago: रुको कविता रुको समाज, सामाजिकता रुको रुको जन, रुको मन। रुको सोच सौंदर्य रुको ठीक इस क्षण इस पल इस वक … more →
अफ़लातून wrote 3 months ago: आ मैं तुझे खुद में शामिल करता हूँ मेरी रातों में कही जा तू कविता फैलता हुआ तुझे थामने स्थिर होता लील … more →
अफ़लातून wrote 3 months ago: [ लाल्टू भौतिकी के प्रोफ़ेसर हैं । कवि और कहानीकार हैं । अध्यापक राजनीति से भी जुड़े रहे हैं । ब्लॉग क … more →
अफ़लातून wrote 5 months ago: दक्षिण में दोनों प्रकार के आरक्षण के प्रति चेतना अधिक है । नौकरियों में अधिक पहले से आरक्षण होने के … more →
अफ़लातून wrote 5 months ago: [ अब की गरमियों में पहला पड़ाव हैदराबाद था । जहाँ एक जानदार व्यक्ति - लाल्टू से मुलाकात हुई । उनकी कव … more →