चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ सब कुछ पाकर भी चैन कहा भागती है हसरते ज़ीले मन मर्जी न लौट ने वाला लम्हा फक़्त हूँ | … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ सब कुछ पाकर भी च … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ज़िंदगी का हर कदम तेरे साथ चलते है हर लम्हा तुझ संग बिताने हम मचलते है डर है तू सफ़र में कही आगे न न … more →
kmuskan wrote 1 year ago: लमहा लमहा बुनकर बनती है िजंदगी लमहा- लमहा बदलती है िजंदगी हर लमहा अपने साथ कुछ लेकर आता है कुछ खुिशँ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तेरी याद में कितनी करवटें बदली,कितनी सिलवटें बिखरी नींद से कोसो दूर वो रात भी जागी साथ हमारे गम-ए … more →
mehhekk wrote 1 year ago: वक़्त ही बाकी रह गया है अक्सर सुनती आई हूँ,वक़्त की कमी है | मेरी आँखों में बस, तेरी यादों की नमी है … more →