कैसे मिलूँ तुमसे जो न मिलना चाहो चला चलूँ अगर साथ चलना चाहो नहीं कहते हो मुझ से हर बार तुम करूँ क्या’ जो तुम ख़ुद जलना चाहो मैं मसख़रा ही सही तुम तो गुल हो तुमको हँसा दूँ जो तुम खिलना चाहो देख ल… more →
तख़लीक़-ए-नज़रदरभंगिया wrote 3 weeks ago: बहुत दिनों बाद यह किस्सा याद आया, तो सोचा आप लोगों से भी बाँट लूं. हो सकता है आप ने पहले भी सुना हो. … more →
विनय wrote 4 months ago: कैसे मिलूँ तुमसे जो न मिलना चाहो चला चलूँ अगर साथ चलना चाहो नहीं कहते हो मुझ से हर बार तुम करूँ क्या … more →
madsadman wrote 4 months ago: I recieved a forwarded mail from Magan Pathak… He sent me some cool Sardaar jokes.. I am attac … more →
विनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →