सागर किनारे तक आकर आलिंगन देती ल़हेरे आते वक़्त भर भरके तुम्हारी यादे समेट लाती है मेरे मन में उठते हुए हज़ारों ख़याली तूफ़ानो को बहुत दूर कही तो अपने साथ वापस ले जाती है गीली रेत पर तुम्हारा ना… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: सागर किनारे तक आकर आलिंगन देती ल़हेरे आते वक़्त भर भरके तुम्हारी यादे समेट लाती है मेरे मन में उठत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.उठ उठ कर उँची आ जाती है किनारों पर ल़हेरें मानती है उनको किनारों से गहरा प्यार है लिपट कर वापस ल … more →