mehhekk wrote 1 year ago: झुरियाँ “डाकिया” आवाज़ सुन दौड़ के जाना चाहती आँगन थके हुए कदम रुक रुक कर ही चलते थैले … more →
विनय wrote 1 year ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्मीद है दोनों दिल खिलेंगे … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं पैग़ामे-मोहब्बत चिठ्ठियाँ लाती नहीं तुम क्या जानो बेक़रारी मेरी प्य … more →
विनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →
विनय wrote 1 year ago: याद आती हैं फिर वह तारीख़ें मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें लिखना पुराने ख़तों को दोबारा पूछना क्या नाम ह … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी बाइसे-ज़ीस्त, तुमको इक नज़र देखने के बाद मैं क्यों मुदाम तुम्हारी जानिब खिंचता रहता हूँ? क्यों इक … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे दिलसिताँ, तुम्हें देखकर मुझे पहली बार यूँ लगा था कि मेरी ज़िन्दगी मेरे सामने खड़ी है| मेरे बदन म … more →
विनय wrote 1 year ago: My Love, Love is an eternal feeling. For you my affection is an eternity. You are an offish because … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खत लिखने की रस्म नयनो में ये घटा,आज फिर घिर आई है खुशियों की बरसात बिन मौसम लाई है | डाकिया कितने दि … more →