सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता (रुख़ : face; नक़ाब : veil; आहिस्ता आहिस्ता : slowly, slowly; आफ़ताब : The Sun) जवां होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया परदा … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता आहिस्ता (रुख़ : face; नक़ाब … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी परेशां क्य … more →