रंग महौब्बत का है ताउम्र चमकता रहता है । इस नगरी में जादु है गुलाल बरसता रहता है । क्या तुम से मिलता है ? एक दिवाना भटकता रहता है । बचपन जिसके साथ है वो हर पल चहकता रहता है । शाख से गिरता है और भट… more →
लम्हें जिन्दगी केदरभंगिया wrote 2 weeks ago: बेकार की लफ्फाजी ही करनी है ना! तो कर देंगे. और बन जायेगी एक कविता. बिन अर्थ, बेकार. ऐसा नहीं है. हर … more →
alishaminta wrote 2 weeks ago: The poem which depicts about lovers emotion when they are missing the love. What happens to ones emo … more →
mequitnever wrote 3 weeks ago: यह एक मज़ेदार प्रसंग है | मर्द और औरत दोनों ही इस बात को बड़ी दिलचस्पी से लेते है | मगर बूढ़े कौआ छू ग … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 3 weeks ago: रंग महौब्बत का है ताउम्र चमकता रहता है । इस नगरी में जादु है गुलाल बरसता रहता है । क्या तुम से म … more →
mequitnever wrote 3 weeks ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →
alakh niranjan wrote 1 month ago: हमारे मन में हमेशा यह उलझन रहती है कि धन और ध्यान में क्या साधे और क्या छोड़ दें? किस्सों कहानियों क … more →
Gaurav Mishra wrote 1 month ago: A boy and a girl were playing together. The boy had a collection of marbles. The girl had some swe … more →
उन्मुक्त wrote 1 month ago: ‘पुरुषों की ब्रीफ तो लम्बी हो सकती है पर महिलाओं की स्कर्ट ब्रीफ नहीं हो सकती। नेकटाई मर्यादित … more →
mequitnever wrote 1 month ago: माक्यावैली की किताब "द प्रिन्स", 1532 में प्रकाशित निकोलो माक्यावैली द्वारा, इतालवी भाष … more →
mequitnever wrote 1 month ago: 31 वर्षीय निकोलो माक्यावैली सन् 1500 में ” द प्रिन्स ” इतालवी भाषा में लिखित एक राजनीति … more →
mequitnever wrote 1 month ago: If I could ever don’t try If I could ever not fail If I could ever not stop thinking If I coul … more →
mequitnever wrote 1 month ago: चलाचल हूँ मैं एक अंधेर नगरी को ढुँढता हूँ रौशनी दम घुटता है कुछ अच्छा नहीं लगता पर चलना है , गुजरना … more →
Sumit Vijayvargiya wrote 2 months ago: however scary the path may be however hazy the situation may be there’s always a glimmer at th … more →
उन्मुक्त wrote 2 months ago: यह चिट्ठी रिश्तों के बारे में है, उनसे निकलती खुशबू, जीवन के भावात्मक पहलू दर्द, प्रेम, मित्रता के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लि … more →
Maheep Saraf wrote 2 months ago: खोया खोया हूँ कई दिनों से, किस वज़ह से मुझे पता नहीं घना अंधेरा छाया हे नभ में, पर दिखती कोई घटा नही … more →
mequitnever wrote 2 months ago: श्रद्धांजलि आज बहुत दिन बाद कुछ वक्त मिला है तो लिखने की ज़रुरत महसूस हो गयी | शायद खालीपन मुझे पसंद … more →
mequitnever wrote 3 months ago: After breathing for 22 years 8 months 2 weeks 5 days 9 hours 17 minutes and counting, I realized, … more →