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वक़्त गुज़रा किया पल-पल आदतन

विनय wrote 1 year ago: मैं ईज़ा1 में पड़ा नदामत2 को तड़पता रहा जैसे शोला बुझती आग में भड़कता रहा मैं कमरे में बैठा खोया रहा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, आँख, आदतन, कड़क, कमरा, ख़्याल, चौखट, दरवाज़ा, दिन