यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह ब… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 months ago: यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार य … more →
विनय wrote 4 months ago: तुमने हमसे हमको चुराया दिल में अपने हम … more →
विनय wrote 7 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more →