उन्माद के खिलाफ़ उन्माद कभी ज्यादा देर तक नहीं ठहरता , यही है लक्षण उन्माद का । बीजों में , पेड़ों में , पत्तों में नहीं होता उन्माद आँधी में होता है पर वह भी ठहरती नहीं ज्यादा देर तक जब हम होते हैं उ… more →
यही है वह जगहSarvesh K Tiwari wrote 3 weeks ago: dADhi ke rakhaiyan kI DADhi sI rahati cHAti bADhI marjAda jasa hadda hinduvAne kI!! kaDhi gaI raiyat … more →
Sarvesh K Tiwari wrote 3 weeks ago: jora rusiyAna ko hai tega khurAsAna hU kI nIti inglaNDa chIna hunnara mahAdarI himmata amAna maradAn … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय … more →
Maheep Saraf wrote 2 months ago: खोया खोया हूँ कई दिनों से, किस वज़ह से मुझे पता नहीं घना अंधेरा छाया हे नभ में, पर दिखती कोई घटा नही … more →
Maheep Saraf wrote 3 months ago: बस एक बार बता दे ग़लती मेरी, चाहे फिर कभी बात ना हो मुस्करा दे एक बार अब तो, इस तरह मुझसे नाराज़ ना … more →
Maheep Saraf wrote 3 months ago: अब समझ में आया लोग चाँद को खूबसूरत क्यों कहते हैं शायद मेरी तरह वो भी उसमे तेरी ही झलक को देखते हैं … more →
anileklavya wrote 4 months ago: (कविता – स्तेफ़ान स्पेंडर) बंदूकें धन के अंतिम कारण के हिज्जे बताती हैं बसंत में पहाड़ों पर सी … more →
anileklavya wrote 4 months ago: (लेख – अरुंधती रॉय) अभी हाल ही में एक युवा कश्मीरी मित्र से मेरी बात हो रही थी कश्मीर में जीवन … more →
Maheep Saraf wrote 4 months ago: पल पल हर्षित , हर पल गर्वित नई उड़ान और नयी अभिलाषा कर्म प्रतीक हाथों के संग हम लिखें नवीन जीवन परि … more →
Maheep Saraf wrote 4 months ago: मैं नहीं जानता कहाँ जा रही हे ये जिंदगी क्यों ये धड़कने मेरी आवाज़ मुझको देती हे क्यों साँसों मे मेर … more →
Maheep Saraf wrote 4 months ago: मेरी तन्हाई का उनको अहसास कहाँ हे छोड़ कर अकेले हमको वो मस्त वहाँ हे जीयें या मरें उनकी बाला से हम प … more →
anileklavya wrote 4 months ago: (कविता – स्तेफ़ान स्पेंडर) मैं हमेशा उनके बारे में सोचता हूँ जो सच में महान थे मैं हमेशा उनके … more →