रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जाना के ख़िलाफ़ और अगर होश की पूछो तो मुझे होश नहीं अब तो तासीर-ए-ग़म-ए-इश्क़ यहां तक पहुंची के इधर होश अगर… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामविनय wrote 10 months ago: उसने हमसे कभी वफ़ा न की और हमने भी तमन्ना न की बहुत बोलते हैं सब ने कहा सो आदत-ए-कमनुमा न की बहुत आये … more →
विनय wrote 12 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 1 year ago: हिक़ारत भरी नज़रों से जिसे देखा है दुनिया ने उसको तुम एक नज़र मोहब्बत से देख लेना, वह मुफ़लिस है मगर जीन … more →
विनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे ग़म सहना, किसी से कुछ न कहना फ़ितरत ऐसी हो गयी, दिन-रात मरके जीना शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़ … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जान … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो जिसने ये दर्द दिया है वो दवा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हर गोशा गुलिस्तां था कल रात जहां मै था एक जश्न-ए-बहारां था कल रात जहां मै था नग़्मे थे हवाओं में जादू … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को ये ज़बां चलती है नासेह के … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक दीवाने को ये आये हैं समझाने कई पहले मै दीवाना था और अब हैं दीवाने कई मुझको चुप रहना पड़ा बस आप का … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या करते हो और फिर आँख चुराते हो ये क्या करते हो बाद मेरे कोई मुझ सा … more →
विनय wrote 1 year ago: वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा जिस दिन भी पुकारा उसने मुझे मेरे मद्यए-मुक़ाबिल के सर मौत का सेहरा होग … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या होगी मैंने सय्यारों की तरह भटककर देखा है इसमें दूर-दूर तक इसम … more →
विनय wrote 1 year ago: मोती दो’ साथ पिरोना और लड़ना और बिगड़ना और बात अलग है तन्हा जीना तन्हाई से बातें करना और आधी-आ … more →
विनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: I feel your love n’ the flames of love It just the first time When I am in love I feel your lo … more →
विनय wrote 1 year ago: In my eyes You live only Without you I live lonely When you’re coming Tell me baby When you … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: 28 दिसम्बर 2007 कुछ सप्ताह पहले ग़जल सम्राट जगजीत सिंह अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें दिमाग में खून का … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: आप को देख कर देखता रह गया, क्या कहुँ और कहने को क्या रह गया, आते आते मेरा नाम सा रह गया, उसके होठों … more →