रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका चाँद को कभी बादलों से उठाया भी गदेली पर रखकर उसे कभी होंटों तक लाया भी रातभर चाँद देखा किये माज़ी मे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रPraful wrote 2 months ago: A husband and wife came for counseling after 20 years of marriage. When asked what the problem was, … more →
Praful wrote 4 months ago: A husband and wife came for counseling after 20 years of marriage. When asked what the problem was, … more →
विनय wrote 6 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
विनय wrote 7 months ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →
विनय wrote 1 year ago: बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने बिछड़ के रहना सीख लिया है क्या तुमने, क्या तुमने … more →
विनय wrote 1 year ago: यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है मैं जिसको चाहता हूँ वह मुझसे बेरंग है उड़ती है बिल्कुल अकेली ढ़ूढ़ती है क … more →
विनय wrote 1 year ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं चाँद … more →
विनय wrote 1 year ago: यह बीते हुए लम्हों का शोर है या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी दिल को कुछ शोर जान पड़ता है मगर वह कानों में … more →
विनय wrote 1 year ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें कितना तन्हा कर जाती हैं रोते हैं सब से छिपकर अँधेरों में ख़ुद … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है दे गया ह … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल के दरवाज़े पर दस्तक देता है कोई रोज़-रोज़ मुझे नये ख़ाबों में मिलता है कोई याद न आती हो ऐसा कोई पल … more →
विनय wrote 1 year ago: How can I cut my pain To shape a new heart How can I write different With same characters, with same … more →
विनय wrote 1 year ago: It was a beautiful dusk When I was at my threshold And waiting for Opening of your door Moon was mov … more →
somen wrote 2 years ago: रात को सिरहाने लिए संग चंद नज़्मे और गाने लिए ज़िन्दगी क्या यूं ही गुज़रेगी सहर क … more →
somen wrote 2 years ago: तन्हाई ने एक दिन मुझसे चुपके से यूं कहा, दिल तुम्हारा आजकल ऐसे क्यों धडक रहा ? अपनी धडकनों से तुम … more →