सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भरा-भरा सपने सारे मेरे टूटे जो साथी तुम मुझसे रूठे मरना गर मेरा वफ़ा हो तो मेरी जान क्यों ख़फ़ा हो आना त… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →
विनय wrote 7 months ago: I’m deserted with dreams to feel the thirst And trying to find all your best I did each n … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा वह कब आयेगी जो … more →
विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहा … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा सपना कब होगा पूरा जो है अब तक अधूरा मेरा सपना कब होगा पूरा जो है अब तक अधूरा कब कोई आयेगी दिल म … more →