जो इश्क़ की आग भड़क उठी है जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ तेरे बदन की कशिश का है जादू देखकर तुझ को मचल रहा हूँ मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि तेरी मरम… more →
तख़लीक़-ए-नज़रNidhi KM wrote 4 days ago: कदमों से कदमों को, मिलाने की बहुत कोशिश की, कभी मैं आगे बढ़ गयी, कभी तुम पीछे रह गये, बातों को बातों … more →
kketish wrote 1 week ago: वो मुझको कभी भी भूल नहीं सकता, लाख चाहे फिर भी बिछड़ नहीं सकता. ¤*.¸¸.·´¨`”*”´¨`·.¸¸.*¤¤ … more →
kketish wrote 1 week ago: उस ने कहा मुझ से कितना प्यार है? मैंने कहा सितारों का कोई शुमार नहीं. उसने कहाँ कौन है ज़िन्दगी मैं … more →
Nidhi KM wrote 1 week ago: सड़क के गढ्ढों मे, डोलता हुआ, आटो चला जा रहा था, एक स्टॉप मे, नवयुवती के चढ़ते ही, सारी नज़रे उस पर … more →
MUKUL wrote 4 weeks ago: प्रिया,सहज ही तुमने क्योंकर भेजा मुझ तक प्रीत निमंत्रण ..! ********************* मैं विरही हूँ तुम प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय संत शिरोमणि कबीरदास … more →
ragzthepoet wrote 2 months ago: ||ప|| నిన్నే తలచి తలచి, నీ చిరునవ్వులకే మురిసి, నీ కోసం, ఆలోచిస్తూ వర్షం లో తడిసి, నీకై ఎదురు చూసి, … more →
Nidhi KM wrote 2 months ago: 1) पहले :- बिन दस्तक, बिन आहट के, तुम मेरे दिल तक आए, कुछ यूँ समाए की, दूजी, सारी दस्तकें, सारी आहटे … more →
khaskhabar wrote 2 months ago: जिंदगी में खुशी और गम व रूठनेमनाने का दौर चलता रहता है,पर प्यार से जीती जंग का मजा कुछ अलग ही होता ह … more →
प्रवीण wrote 2 months ago: ये आपकी बिखरी जुल्फ की ख़ता है, हम नहीं जानते ! ये मेरा दिल भी धराकता है, हम इतना जानते है! … more →
khaskhabar wrote 2 months ago: बाबा कबीरदास जी ने कहा था ” ढाई अक्षर प्रेम का पढे सो पंडित होय “, लेकिन आज अपने आसपास न … more →
Nidhi KM wrote 3 months ago: चाहे जले हमारा जहाँ, रौशन रहे उनका जहाँ, जहाँ रहे चाहत हमारी… न आए उन पर, कोई भी आँच, जहां की … more →
Nidhi KM wrote 1 month ago: तुम बहुत मीठा बोलते हो, हर शब्द को, चाशनी मे घोलते हो, मिशरी की तरह, रस घोलते हो, न कड़वा बोलते हो, … more →
kketish wrote 1 month ago: दूसरों की हद्द में हम क्यूँ क़दम जमाते हैं उनकी आरजू कर के ख़ुद को क्यूँ गंवाते हैं हम भी याद करते ह … more →
kketish wrote 1 month ago: उस शख्स को मेरा हल्का सा एहसास तो है, बेदर्द सही वोह मेरा हमराज़ तो है। वोह आए न आए मेरे पास लेकिन … more →