जो उल्फ़त मेँ नाम रखते हैँ. . . !!
Be Like The Flowing Riverवो जो उल्फ़त मेँ नाम रखते हैँ, कुछ नहीँ बस क़लाम रखते हैँ।। है रविश दोस्तोँ रक़ीबोँ से, दूर से ही सलाम रखते हैँ।। मेरा बस ये उसूल है साकी, आते हाथोँ मेँ जाम रखते हैँ।। बेवजह की ये हमदमीँ-सी है, वो जो तैग़ बेनियाम रखते हैँ।। आज तहज़ीब-ए-बुतकदा यूं है सज़्दा हर गाम-गाम रखते हैँ।। ख़्वाहिशेँ बेपनाह कैसे हो, जी पे हर पल लगाम रखते हैँ।। ईश्क़ माशूक़ से न हो, कुछ लोग, जिन्सी क़ुदरत का ज़्आम रखते हैँ।। ज़िन्दगी “ईश्क़ी” अब तो मुश्किल है, आशिक़ी यूं निज़ाम रखते हैँ।। रविश-तरीका तैग़-तलवार गाम-क़दम जिन्सी क़ुदरत-Natural Sex ज़्आम-भ्रम निज़ाम-कानून नियम
