विनय wrote 6 months ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मु … more →
विनय wrote 6 months ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सित … more →
विनय wrote 6 months ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब ह … more →
विनय wrote 7 months ago: तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास … more →
विनय wrote 8 months ago: रोशनी से दीवारों के साये मिटायेंगे ढू … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे … more →