मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब मैं मतलबी नहीं आशिक़ तुम्हारा हूँ तुम ख़ुदगर्ज़ हो या कोई मासूम पहेली? शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मेरे प्यार को तुम न समझना मतलब मैं मतलबी नहीं आशिक़ तुम्हारा हूँ तुम ख़ुदगर्ज़ हो या कोई मासूम पहेली? … more →
विनय wrote 1 year ago: लगे लगन तो… छूटे नहीं यह… बने सजन तो… टूटे नहीं यह… बनता बन जाय, मिटता मिट ज … more →