“इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है। अभी ज़िंदा है माँ मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है जब भी कश्ती मेरी सैलाब म… more →
Simplysunidhi's Blogsimplysunidhi wrote 6 months ago: “इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है। अभी ज़िंदा है … more →
simplysunidhi wrote 7 months ago: MAA” ki aik DUA zindagi bana degi Khud royegi magar tume hansa degi Kahin bhool k bhi na … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे | ये चार लाईने मैं अपनी माँ क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू- नारी 1. ममता से भरी अन्नपूर्णा कहलाती है जन्मदात्रि 2. जिसके बिना सारा जग सुना सु … more →