मदीने को जायें ये जी चाहता है, मुक़द्दर बनायें ये जी चाहता है, मदीने के आका दो आलम के मौला, तेरे पास आयें ये जी चाहता है, जहां दोनों आलम हैं महर-ए-तमन्ना, वहां सर झुकायें ये जी चाहता है, मोहम्मद की बात… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: मदीने को जायें ये जी चाहता है, मुक़द्दर बनायें ये जी चाहता है, मदीने के आका दो आलम के मौला, तेरे पास … more →