जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं मस्ती दिल पर छायी अनजानी-सी उड़ती फिरे है जैसे फूलों पर तितली दिल में जाने कैसा तूफ़ान उठा है यूँ लगता है हर पल … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जादू जैसा छाया पहला-पहला नशा जी में आये पंख खोल उड़ जाऊँ मैं आस्माँ से आगे निकल जाऊँ मैं मस्ती दिल प … more →