सौवर्णासनसंस्थितांत्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सच्चम्पकस्त्रग्युताम् | हस्तैर्मुद्गरपाश वज्ररसनाःसंबिभ्रतीं भूषणैर्व्याप्तांगी बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनींचिन्तयेत् || स… more →
साधना विचारNikhilashish wrote 1 year ago: सौवर्णासनसंस्थितांत्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीं हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सच्चम्पकस्त्रग्युताम् | हस … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: विश्वव्यापकवारिमध्यविलसच्छ्वेताम्बुजन्मस्थितां कर्त्रीँखड्गकपालनीलनलिनै राजत्करां नीलभां | कांचीकुण् … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: अपने साधनात्मक जीवन के प्रारंभ में गुरु साधना के उपरांत मेरे द्वारा सफलतापूर्वक की गई प्रथम साधना मा … more →
Nikhilashish wrote 1 year ago: सद्यश्छिन्नशिरः कृपाणमभयं हस्तैर्वरंबिभ्रतीँ घोरास्यां शिरसांस्त्रजासुरुचिरामुन्मुक्तकेशावलिम || स्र … more →