मै चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले किताब-ए-माज़ी के औराक़ उलट के देख ज़रा ना जाने कौन सा सफ़हा मुड़ा हुआ निकले जो देखने में बहुत ही करीब लगता है उसी के बारे में सोचो तो फ़ास… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: मै चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले किताब-ए-माज़ी के औराक़ उलट के देख … more →