तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गए इस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गए तड़पा भी गए हम अर्ज़-ए-वफ़ा भी कर ना सके कुछ कह ना सके कुछ सुन ना सके यां हम ने ज़बां ही खोले थी वां आँख झुकी शरमा भी … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गए इस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गए तड़पा भी गए हम … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात नूर ही नूर है किस सिम्त … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: शहर की रात और मै नाशाद-ओ-नाकारा फिरूं जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूं ग़ैर की बस्ती है कब तक दर-ब- … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो? मैने माना के तुम इक पैकर-ए-रानाई हो चमन-ए-दहर में रूह-ए-चमन आरा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हिज़ाब-ए-फ़ितना परवर अब उठा लेती तो अच्छा था खुद अपने हुस्न को परदा बना लेती तो अच्छा था तेरी नीची नज़र … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे … more →