दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: <strong>रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय</strong … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से उठकर हम अक्सर उनकी गोद में समा जाते है | बिन कहे ही वो कुछ ऐसी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मन पखेरू उड़ जा मन पखेरू उड़ जा लै आ कोई संदेस बरस पर बरस बीत रहे पिया भए परदेस | मिलते ही उनसे ये … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ऐसी कशीश है तुझमें ,खिची चली आती हूँ साथ मेरे मन की तरंगे, तुमसे बाटने लाती हूँ | तुमसे मेरा र … more →