ऐसी हर सहर कीजिए नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | पैगाम-ए-मोहोब्बत भेजा है खत में नाज़निन कबुल हो गर तोहफा-ए-इश्क़ हमसे नज़र कीजिए | खुशियाँ बाटने यह… more →
mehekदीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आदमी कभी बंदर रहा होगा-इस सिद्धांत पर यकीन नहीं होता। दरअसल बरसों पहले यह पश्चिमी सिद्धांत पढ़ा था कि … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ऐसी हर सहर कीजिए नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | प … more →
mehhekk wrote 1 year ago: त्रिवेणी 1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही खुद को ही बहुत अजनबी … more →