मैंने जब हिन्दी में ब्लॉगिंग शुरु की उस समय से इस समय की कुछ दशा ही और है ! वैचारिक मतभेद तब भी थे लेकिन गोलबन्दियों के खाँचे खिड़कियों की गुंजाईश लिए हुए थे । एक बार सागर नाहर ने चिट्ठेकारी बन्द करने … more →
शैशवअफ़लातून wrote 5 months ago: मैंने जब हिन्दी में ब्लॉगिंग शुरु की उस समय से इस समय की कुछ दशा ही और है ! वैचारिक मतभेद तब भी थे ल … more →