Blogs about: Manu Smruti

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मनु स्मृति: अपने उपभोग से पहले दान करें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्रह्यणि च। अदत्तान्युपयु´्जानः एनसः स्वात्तुरीभाक्।। हिंदी में भावार … more →

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मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

मनुस्मृतिः हिंसा से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्यद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वग्र्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत्।। … more →

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मनुस्मृति-अपशब्द का उत्तर अपशब्द से न दें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म वि … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, धर्म, मातृभाषा, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Culture

मनुस्मृति: त्याग करने वाला मनुष्य ही होता है श्रेष्ठ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: न जातु कामा कामानामुपभोगेन शाम्यति हविपा कृष्णावत्र्मेव भूव एवाभिवर्धते जिस प्रकार अग्नि में … more →

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मनुस्मृतिःअधिकारियों के सामने प्रजा लुटे,वह राज्य निरर्थक है

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: १.उस राजा को जीवित रहते हुए भी मृतक समान समझना चाहिए जिसके स्वयं या राज्य के अधिकारियों के सामने चीख … more →

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मनुस्मृतिःस्वामी वही जो नौकर से भी निभाये1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आर्तस्तु कुर्यात्स्वस्थ: सन्यथाभाषितमादित:। स: दीर्घस्यापि कालस्य तल्लभेतैव वेतनम।। मनु स्मृति के इस … more →

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रहीम के दोहःगुरु से शिक्षा लेकर अपनी राह चलें

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: कहते को कहिं जान दे, गुरू की सीख तू लेय साकट जन और स्वान को, फेरि जवाब न देय कविवर रहीम कहते है कि क … more →

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कभी कभी आंखों में आंसू आ जाते हैं-हिन्दी शायरी4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दर्द से भला कहां हमारे आंखों में आसू आते हैं दूसरों के दर्द से ही जलता है मन उसी में सब सूख जात … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य

मनुस्मुतिःस्त्रियों का सम्मान न हो तो शुभकर्मों का फल भी नहीं मिलता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:  पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस्तथा पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभिः विवाह के समय अपने कल् … more →

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मनु स्मृतिःधन और अन्न न हो तो जल का दान भी पुण्य देना वाला 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भिक्षामप्युदपात्रं वा सत्कृत्य विधिपूर्वकम् वेदतत्त्वर्थविदूषे, ब्राहणानापादयेत, यदि अपने घर में खाद … more →

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मनुस्मृतिःपरिवार के लिये धन पूरा हो तभी सोमयज्ञ करें3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यस्यं त्रैवाषिक्र भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तये अधिकं वापि विद्येत  सः सोम पातुमर्हति जिस व्यक्ति के … more →

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मनुस्मृति:ढोंगी आदमी को पानी भी न पिलायें 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न वार्यपि प्रयचछत्तु बैडालव्रतिके द्विजे न बकव्रतिके विप्रे नावेदविदि धर्मवित् धार्मिक वृत्ति के लोग … more →

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मनुस्मृति: मांस खाने से कभी स्वर्ग नहीं मिलता 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यद्ध्यायति यतकुरुते धृतिं बध्नाति यत्र च तद्वाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ऐसा व्यक्ति जो किस … more →

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मनुस्मृति:राज्य सभी धर्मों के पालन कराने वाला मध्यस्थ 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड द … more →

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मनुस्मृति:बिना मांगे मिल जाये उसे अमृत समझें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इन्द्रियों के विषयों-रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श-में विद्वानों को कभी आसक्त नहीं होना चाहिए. विषय … more →

Tags: Blogroll, writing, Global Dashboard, Thought, संस्कार, inglish, संपादकीय, आस्था, आध्यात्म

मनुस्मृति:राज्य दंड की शिथिलता समाज को नष्ट कर देती है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.सारी प्रजा की रक्षा और उस पर शासन दंड ही करता है, सबके निद्रा में चले जाने पर दंड ही जाग्रत रहता ह … more →

Tags: हिन्दी, Global Dashboard, आध्यात्म, संपादकीय, धर्म, अभिव्यक्ति, Internet, arebic, Education

मनु स्मृति: दंड का उचित उपयोग न करने वाला अपयश का भागी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १. जो व्यक्ति ऐसे लोगों को दंड देता है जिन्हें दंड नहीं देना चाहिए तथा जिनको देना चाहिऐ उनको नहीं द … more →

Tags: adhyatm, astha, अध्यात्म, आलेख, आस्था, इंटरनेट, चिन्तन, दर्शन, दीपक भारतदीप

मनुस्मृति:एक दिन से अधिक ठहरने वाला अतिथि नहीं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.एक सज्जन व्यक्ति के घर से बैठने या विश्राम के लिए भूमि, तिनकों से बने आसन, जल तथा मृदु वचन कभी दूर … more →

Tags: Blogroll, Hindi friends, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, hindi sahity, hindu dharm


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