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Blogs about: Manu Smruti

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मनु स्मृति-हृदय में यम साक्षी रूप में स्थित रहते हैं (jhooth mat bolo-manu smriti)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यमो वैवस्वतो देवो यस्तवैध हृदिस्थितः। तेन चेदविवादस्ते मां गंगा मा कृरून गमः।। हिंदी में भावार्थ-सभी … more →

Tags: हिंदी, आलेख, आध्यात्म, हिंदी पत्रिका, भगवान, कला, सूचना, अध्यात्म, hindu

मनु स्मृति-अध्ययन में सुस्ती नहीं करें (manu smriti-shiksha aur susti)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अध्येयष्यमाणं तु गुरुर्नित्यकालमतन्द्रितः। ‘अधीष्व भो! इति ब्रुयाद्विरामोऽस्त्विति चारमेत्।। हिंदी म … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सन्देश, समाज, हिन्दी, dharm

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च। शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं … more →

Tags: adhyatm, alekh, Anubhuti, arebic, Article, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम

मनु स्मृति: अपने उपभोग से पहले दान करें

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्रह्यणि च। अदत्तान्युपयु´्जानः एनसः स्वात्तुरीभाक्।। हिंदी में भावार … more →

Tags: हिन्दी, dharm, adhyatm, hindi article, अध्यात्म, धर्म, हिन्दू, दर्शन, हिंदी साहित्य

मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

मनुस्मृतिः हिंसा से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्यद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वग्र्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत्।। … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, अध्यात्म, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दू, Deepak bharatdeep

मनुस्मृति-अपशब्द का उत्तर अपशब्द से न दें

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म विष … more →

Tags: inglish, हिन्दी, Dashboard, आध्यात्म, धर्म, अभिव्यक्ति, Internet, online jurnalism, Culture

मनुस्मृति: त्याग करने वाला मनुष्य ही होता है श्रेष्ठ

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: न जातु कामा कामानामुपभोगेन शाम्यति हविपा कृष्णावत्र्मेव भूव एवाभिवर्धते जिस प्रकार अग्नि में घी डालन … more →

Tags: Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi writing, web duniya, Hindi vews, hindi thinking, hindi internet, web jagaran, web nai duniya

मनुस्मृतिःअधिकारियों के सामने प्रजा लुटे,वह राज्य निरर्थक है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.उस राजा को जीवित रहते हुए भी मृतक समान समझना चाहिए जिसके स्वयं या राज्य के अधिकारियों के सामने चीख … more →

Tags: समाज, हिंदी पत्रिका, Deepak bharatdeep, hindi megzine, Hindi writing, web bhasakar, web dunia, web duniya, web jagaran

मनुस्मृतिःस्वामी वही जो नौकर से भी निभाये1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आर्तस्तु कुर्यात्स्वस्थ: सन्यथाभाषितमादित:। स: दीर्घस्यापि कालस्य तल्लभेतैव वेतनम।। मनु स्मृति के इस … more →

Tags: अध्यात्म, मस्तराम, समाज, Blogroll, Deepak bharatdeep, hindi abhivyakti, hindi adhyatm, hindi anubhuti, hindi bhasha

रहीम के दोहःगुरु से शिक्षा लेकर अपनी राह चलें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते को कहिं जान दे, गुरू की सीख तू लेय साकट जन और स्वान को, फेरि जवाब न देय कविवर रहीम कहते है कि क … more →

Tags: abhivyakti, Adhyaatm, Anubhuti, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, इंटरनेट, चिंतन

कभी कभी आंखों में आंसू आ जाते हैं-हिन्दी शायरी4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दर्द से भला कहां हमारे आंखों में आसू आते हैं दूसरों के दर्द से ही जलता है मन उसी में सब सूख जात … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, जजबात, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य कविता, हास्य व्यंग्य

मनुस्मुतिःस्त्रियों का सम्मान न हो तो शुभकर्मों का फल भी नहीं मिलता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:  पिर्तभिभ्रौतृभिश्चैता पतिभिदैवरैस्तथा पूज्या भूषयितव्याश्च बहुकल्याणमीप्सुभिः विवाह के समय अपने कल् … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindi Education, Hindi friends, Hindi online journalism, Hindi kahane, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan

मनु स्मृतिःधन और अन्न न हो तो जल का दान भी पुण्य देना वाला 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भिक्षामप्युदपात्रं वा सत्कृत्य विधिपूर्वकम् वेदतत्त्वर्थविदूषे, ब्राहणानापादयेत, यदि अपने घर में खाद … more →

Tags: Hindi online journalism, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindu dharm, hindi mitra, hindi duniya

मनुस्मृतिःपरिवार के लिये धन पूरा हो तभी सोमयज्ञ करें3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यस्यं त्रैवाषिक्र भक्तं पर्याप्तं भृत्यवृत्तये अधिकं वापि विद्येत  सः सोम पातुमर्हति जिस व्यक्ति के … more →

Tags: Blogroll, hindi Personal, Hindi Education, Hindi friends, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture

मनुस्मृति:ढोंगी आदमी को पानी भी न पिलायें 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न वार्यपि प्रयचछत्तु बैडालव्रतिके द्विजे न बकव्रतिके विप्रे नावेदविदि धर्मवित् धार्मिक वृत्ति के लोग … more →

Tags: Blogroll, Hindi Darshan, Hindu darshan, bharat, hindu dharm, web duniya, hindi adhyatm, hindi life, hindi megzine

मनुस्मृति: मांस खाने से कभी स्वर्ग नहीं मिलता 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यद्ध्यायति यतकुरुते धृतिं बध्नाति यत्र च तद्वाप्नोत्ययत्नेन यो हिनस्ति न किञ्चन ऐसा व्यक्ति जो किसी … more →

Tags: Blogroll, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, India, bharat, hindu dharm

मनुस्मृति:राज्य सभी धर्मों के पालन कराने वाला मध्यस्थ 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड दे … more →

Tags: glogbal dashborad, dharm, संपादकीय, हिंदी साहित्य, media, Education, Friends, Blogger, Blogging

मनुस्मृति:बिना मांगे मिल जाये उसे अमृत समझें

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.इन्द्रियों के विषयों-रूप, रस, गंध, शब्द और स्पर्श-में विद्वानों को कभी आसक्त नहीं होना चाहिए. विषय … more →

Tags: Blogroll, writing, Global Dashboard, Thought, संस्कार, inglish, संपादकीय, आस्था, आध्यात्म


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