काली घटाओं के पर्दे से झाकता है कोई अध खुले उन नयनो से ताकता है कोई | हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही | दर्पण से कुछ पूछू वो जवाब नही देता मालूम नही … more →
mehekalishaminta wrote 2 days ago: Meri raushan hai duniya, tumhi se tumhi se Hai mujhko mohobbat tumhi se tumhi se Kitna mushkil hai j … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काली घटाओं के पर्दे से झाकता है कोई अध खुले उन नयनो से ताकता है कोई | हम तो अनजान बन गुजर जात … more →
mehhekk wrote 1 year ago: है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ैद का आभास अंधेरों में … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कभी ख़त्म ना होनेवाला रेगिस्तान हो जैसे अक्सर हमे जीवन के पल प्रतीत होते है ऐसे उँचे तूफ़ानो के बवंड … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.. जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है | 2,, ये तन्हा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ख्वाब अँखियों की पलकों में समाए ये रहते मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हिन्दी में हाइकू लिखने का हमारा ये पहला प्रयास है| हाइकू – समय 1. रोकना चाहती हूँ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ये दुनिया एक विशाल सागर हम बसे हे इसकी कन कन में सुख दुख तो आते जाते रेहते जीवन बदले हर एक क्षण में … more →