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Blogs about: Mar 2007

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चाँद दर्द का जला, दिल में उतरी चाँदनी

Rohit Jain wrote 1 year ago: चाँद दर्द का जला, दिल में उतरी चाँदनी तन्हाई ही छोड़ गई, जहाँ पे बिखरी चाँदनी ढ़ूंढ़ता ही रह गया सहर, श … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, उतरी, कविता, का, गज़ल, चाँद, चाँदनी

दिल में अजब से ख़यालात हैं

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल में अजब से ख़यालात हैं आज उनसे पहली मुलाक़ात है ज़ुल्फ़ें जो बिखरीं तो फ़िर क्या कहें लगा दिन में जैस … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, अजब, दिल, में, से, हैं, ख़यालात

खुशबू कोई भटकती हुई साँसों में चली आती है

Rohit Jain wrote 1 year ago: खुशबू कोई भटकती हुई साँसों में चली आती है काँच के ख्वाब लाती हैं, हिज्र की बिजली लाती है जब भी सुनता … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, आती, कविता, कोई, खुशबू, गज़ल, चली

आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती

Rohit Jain wrote 1 year ago: आजकल उनसे तबियत नहीं मिलती अब वो पहले सी राहत नहीं मिलती हम ही हैं जिसको नसीब हिज्र है सब को शब-ए-फ़ु … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, आजकल, उनसे, कविता, गज़ल, जैन, तबियत

मोहब्बत नये पर लगाकर उड़ा दी

Rohit Jain wrote 1 year ago: मोहब्बत नये पर लगाकर उड़ा दी मेरी ख़ाक जुगनू बनाकर उड़ा दी अंधेरे की कालिख तो रहने दो मुझ पर चाँदनी तो … more →

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ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा ज़र … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, , आओ, कविता, गज़ल, जाये, जैन

उसकी गली में यारों आज उससे सामना है

Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना ब … more →

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मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, कविता, का, गज़ल, जैन, नाम, भी

हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा

Rohit Jain wrote 1 year ago: हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा वो और कुछ नहीं था एक अजनबी के सिवा ना जफ़ाएं ना तक़ाज़े ना बेरुखी ना दग … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, आया, कविता, कुछ, के, गज़ल, जैन

शाम खाली है जाम खाली है

Rohit Jain wrote 1 year ago: शाम खाली है जाम खाली है ज़िन्दगी यूँ गुज़रने वाली है सब लूट लिया तुमने जानेजाँ मेरा मैने तन्हाई मगर बच … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, कविता, खाली, गज़ल, जाम, जैन, रोहित

उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: उसे प्यार करने में मै अपना घर जला बैठा खुद अपने ही सीने पे एक नश्तर चला बैठा हर बार सोचता था बदलूंगा … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के ब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, पल, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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