Lost your password?

Blogs about: Mar 2008

Featured Blog

एक काव्यात्मक गुस्ताखी3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ… ———————— … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

उस इम्तिहान के पल में हम क्या कहें के झिझक गए4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, पल, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में देख तो मुझे आज मेरा पता मिला दैरोहरम भटका किया, दिलेबेख़बर में खुदा मिला जिस मोड़ से मै ब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, आज

रदीफ़ का खेल.....3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: पैमानेग़म बिखर गया तो मुश्किल होगी ये दिल से उतर गया तो मुश्किल होगी उसे देखा है आज मुद्दतों के बाद क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

खतरे में है3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई नहीं ये जानता के वो कब खतरे में है ज़िंदगी जीने का देखो हर सबब खतरे में है कोई यहां मंदिर को तोड़े … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

क्यों नहीं जाता4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता कब तक रहूं हैरान परे … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, नहीं

हुआ होगा2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै जानता हूं के वहां पे क्या हुआ होगा सच्चाई की आवाज़ पे हमला हुआ होगा सुनता हूं वहां भूख से इक और मर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

देख तो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कैसा सजा है आज ये बाज़ार देख तो इन्सान ही इन्सां का खरीदार देख तो कैसा लगा है आज ये दरबार देख तो मुंस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS