एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं, कितनी सौंधी लगती है तब माझी की रुसवाई भी, दो दो शक़्लें दिखती हैं इस बहके से… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी, यादों की बौछारों से … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक परवाज़ दिखाई दी है, तेरी आवाज़ सुनाई दी है, जिस की आँखों में कटी थीं सदियां, उस ने सदियों की जुदाई … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख से लम्हे नहीं तोड़ा करते, जिस की आवाज़ में सिलवट हो … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आँखों में जल रहा है क्यूं, बुझता नही धुँआ, उठता तो है घटा सा बरसता नही धुँआ, चूल्हा नही जलाया य बस्त … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ज़िंदगी यूँ हुयी बसर तन्हा, काफिला साथ और सफर तन्हा, अपने साये से चौंक जाते हैं, उम्र गुजरी है इस कदर … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: वो ख़त के पुर्जे उडा रहा था, हवाओं का रूख दिखा रहा था, कुछ और भी हो गया नुमाया, मैं अपना लिखा मिटा र … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: शाम से आँख में नमी सी है, आज फ़िर आपकी कमी सी है, दफ़न कर दो हमें की साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे अहसान उतारता है कोई। आईना दिख के तसल्ली हुई हमको इस घर में जानता है … more →