खामोशियाँ भी तेरी दिल को है गवारा अज़ीज-ए-जानशीन के किस्सा-ओ- मोहोब्बत तेरी आँखों से बयान हो जाता दिल-ए-नादान को लगती है चोट,वो रोता भी है कभी कभी समझाना उसे आसान होता,गर लफ़्ज़ों का मरहम मिल पाता | … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: खामोशियाँ भी तेरी दिल को है गवारा अज़ीज-ए-जानशीन के किस्सा-ओ- मोहोब्बत तेरी आँखों से बयान हो जाता द … more →