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Blogs about: Marxism

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चुनाव, राजनीतिक दल और बुद्धिजीवी

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: हमने लिखा था कि वर्तमान संसदीय प्रणाली द्वारा मजदूर वर्ग कभी सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता. लेकिन इसका … more →

Tags: आह्वान, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, पूंजीवादी संकट, बुर्जुआ लोकतंत्र, मार्क्सवाद, समाजवाद, सर्वहारा

मार्क्सवाद क्या है : संसार का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

samayantar wrote 2 months ago: दुनिया बदलती है, और उसे बदला जाता है. यह दुनिया कैसे बदलती है, और कैसे इसे बदला जाता है, मार्क्सवाद … more →

Tags: मार्क्सवाद क्या है, संसार का वैज्ञानिक द, मार्क्स, मार्क्सवाद, India, Marx

सभ्याचार दी भिन्नता अते विकास दा द्वंदात्मक भौतिकवादी नज़रीया (पंजाबी ऑडियो)

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: इस ऑडियो को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें फाइल साईज 4.34 mbs समय  38 मिनट … more →

Tags: Audio, समाज और संस्कृति, संस्कृति

प्रथम अरविन्द स्मृति संगोष्ठी कार्यक्रम

saathisukhdev wrote 5 months ago: (24 जुलाई, 2009) विषय भूमण्डलीकरण के दौर में श्रम कानून और मज़दूर वर्ग के प्रतिरोध  के नये रूप भूमण् … more →

Tags: दायित्वबोध, आह्वान, आंदोलन, पूंजीवादी संकट, संघर्ष, साम्राज्यवाद, काले कानून, उदारीकरण, आधी आबादी

न तो इतिहासग्रस्त, न ही इतिहास विमुख!2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, समाज और संस्कृति, कला, साहित्य, संस्कृति, लोकवाद

श्रम और पूंजी की टक्कर - एक ऐसा 'वैषम्य' जिसका निपटारा बल प्रयोग द्वारा ही होता है 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: श्री दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा लिखित आलेख ‘उद्यम भी श्रम ही है‘ और श्री ज्ञानदत्त जी प … more →

Tags: पुस्तकें, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, संघर्ष, युद्ध, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कार्ल मार्क्स

दलित-प्रश्न और स्त्री-प्रश्न पर सही रुख अपनाओ!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, संघर्ष, कविता, उदारीकरण, जीवन, वर्ग चेतना

सांस्कृतिक मोर्चे पर व्यक्तिवाद, अराजकतावाद, उदारतावाद का विरोध करो!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उदारीकरण, माओ त्से तुंग, वामपंथी

कला-साहित्य-संस्कृति के मोर्चे पर विचारधारात्मक संघर्ष

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, फासिज्म, साम्राज्यवाद, विरासत, Maoism

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट

"कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर …की टिप्पणियों के प्रत्युत्तर में5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट से सम्बंधित प्राप्त टिप्पणियों के पश्चात् यह ज़रूरी हो गया है कि इस विषय पर वाद-विवाद जारी … more →

Tags: दायित्वबोध, प्रतिबद्ध, लेनिन, आह्वान, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन

इस युग का प्रधान वैषम्य : जनतन्तर कथा (34) की हिफाजित में 10 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →

Tags: विचारणीय : मीडिया से, प्रतिबद्ध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, वैकल्पिक मीडिया

कार्ल मार्क्‍स के जन्मदिन (5 मई) के अवसर पर 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: कार्ल मार्क्‍स फ्रेडरिक एंगेल्स विज्ञान के इतिहास में मार्क्‍स ने जिन महत्त्वपूर्ण बातों का पता लगाक … more →

Tags: बिगुल, क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद

श्रम और श्रमशक्ति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 18. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां यहाँ पर मार्क्स और एंगेल्स … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, बाल श्रम, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक

‘कम्युनिस्ट घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां-13

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: पूँजी का संचय पूंजीपतियों के व्यक्तिगत नियंत्रण में पूंजी का संचय दो तरीकों से होता है. सबसे पहले श् … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx

‘कम्युनिस्ट घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां-12

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: शहर और गाँव के बीच दरार जर्मनी में पहले विशाल पैमाने के श्रम विभाजन, शहर से गाँव के अलगाव को स्थापित … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx, कम्युनिस्ट पार्टी क

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-4

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: एजेण्डा पर कम्युनिस्ट क्रान्तिकारियों की एकता का सवाल : एक सर्वभारतीय पार्टी के गठन की ओर नक्सलबाड़ी … more →

Tags: क्रांति, आह्वान, आंदोलन, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, आतंकवाद, विरासत, Maoism

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-32 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: तैयार होती ज़मीन, वह ऐतिहासिक विस्फोट और उसके बाद नवम्बर, 1964 में जब कलकत्ता के त्यागराज हॉल में पा … more →

Tags: क्रांति, आह्वान, आंदोलन, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, आतंकवाद, विरासत, Maoism

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-11. पूंजीवादी व्यवस्था के अंतर्गत संचार के साधनों और परिवहन का विकास 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 11. पूंजीवादी व्यवस्था के अंतर्गत संचार के साधनों और परिवहन का विकास “उद्योग और कृषि की उत्पाद … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx, कम्युनिस्ट पार्टी क


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