कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है देखा नहीं है जाता हारा हुआ ज़माना रखता है लाज देखो गुमराहियों की मौला मंज़िल उसी की आता है भटका हुआ ज़माना आँखें हैं मेरी नादां दिल भी है थोड़ा गाफ़िल दिखता नहीं है इ… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: कमज़ोर मै नहीं हूँ जंगों का दिल नहीं है देखा नहीं है जाता हारा हुआ ज़माना रखता है लाज देखो गुमराहियों … more →