दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अगर आप मुझसे पूछें कि ब्लाग क्यों लिखते हो?’ तो मेरा सीधा जवाब यही होगा कि मेरे पास मनोरंजन के अलावा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं बेकार हूं और आगे भी कार खरीदने की कोई संभावना नहीं है। इसलिये जिस तरह सड़को पर कारों की संख्या ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ यह कदापि नहीं लिया जाना चाहिए कि मै किसी उच्च मध्यम परिवार से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कंप्यूटर के वायरस ऐसे ही लगते हैं जैसे प्रेतात्माएं। पहले जैसे हारर फिल्मों में भूतों द्वारा चीजें उ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लोग क्या है? मेरे लिए एक ऐसी डायरी जिसे कोई भी पढ़ सकता है. अंग्रेजी के लोग इसका कैसे इस्तेमाल करते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आँख के अंधे अगर हाथी को पकड कर उसके अंगों को पकड लें अपने बुद्धि के अनुसार उसके अंगों का बयान कुछ का … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: भारत और आस्ट्रेलिया की बीच हाल ही में संपन्न श्रंखला में आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी साइमंड पर भारतीय दर्श … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: स्वारथ सूका लाकडा, छाँह बिहूना सूल पीपल परमारथ भजो, सुख सागर को मूल संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हीरो और क्लर्क ऐक ही दिन और ऐक ही समय पर मंदिर में करने दर्शन करने पहुँचे क्लर्क तो रोज वहाँ जाक … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब से मोबाइल की बैटरी फ़टने की खबर आई है लोग सहमे हैं जिनके लिये मोबाइल कोई फोन नहीं बल्कि गहने हैं ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं सदियों से अपनी जगह खडे बुत भी लोगों को चलत … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) अपने आईने में हमारा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से वह बहता आता है सहज भाव से अपनी पीडाओं को भुला दो अपनी चाहतों … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब पीते थे तो कोई बुलाता नहीं था मांगते थे तो कोई पिलाता नहीं था जब छोड़ दीं तो सब बुलाते हैं जैसे मय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारिता का क्षेत्र समाज में आकर्षण का केंद्र होते हैं । यही नहीं जिन … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हमारे देश के अनेक महापुरुष कह चुके हैं कि जीवन अपने आप में एक मृग तृष्णा है । और ऐसा नहीं है कि हमार … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने बारे में मुझे दो बातें पता है कि मेरी बुधिद एकदम मन्द है और दूसरा यह कि इस कारण हादसे होंगे ही … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मैं क्यों लिखता हूँ , मुझे नहीं मालुम ! अब सवाल भी अपने से है जवाब भी स्वयं ही दे … more →