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विभिन्न समाजों का पुराने ढर्रे पर चलना अब कठिन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना, अनुभूति, आलेख

व्यंग्य भी होता है एक तरह से विज्ञापन-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन उस लेखक मित्र से मेरी मुलाकात हो गयी जो कभी कभी मित्र मंडली में मिल जाता है और अनावश्यक रूप व … more →

Tags: Blogroll, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, अनुभूति, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, Education

हिंदी ब्लागःलेखकों को नाम व नामा मिले बगैर अंतर्जाल पर पाठक जुटाना मुश्किल6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर लिखते हुए आप कोई बात दावे से नहीं कह सकते क्योंकि एक तो इसका क्षेत्र बृहद है और इसमें तक … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, भारत

आम आदमी बने रहने की कोई नहीं सोचता-आलेख5 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहने को कई लोग आपसी वार्तालाप में ऐसी टिप्पणियां कर जाते हैं जो उनके स्वयं के समझ में नहीं आतीं तो क … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, हास्य व्यंग्य, अनुभूति, आलेख, साहित्य

छद्म ब्लाग ने सास से बचाया-हास्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर बहू ने अपना एक ब्लाग बनाया और अपनी सास को भी दिखाया हंसते हुए सास ने कह दिया ‘तुम मेरे क … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, Global Dashboard, inglish, व्यंग्य चिंतन, शेर-ओ-शायरी, शायरी, अभिव्यक्ति

कोई स्टार तो कोई फ्लाप ब्लागर-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागर पार्क में दोनों ब्लागर प्रतिदिन सुबह लड़ते थे। एक कहता कि ‘मैं  हिंदी का सबसे बड़ा ब्लागर’ तो … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, हिंदी साहित्य, साहित्य, Education, Friends

सत्य से पीछा छुड़ाकर कहां जायें-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लाया फंदेबाज कई तस्वीरें और दिखाते हुए बोला ‘‘दीपक बापू, तुम ही एक दोस्त हो जिससे हम कुछ कह पाते हैं … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, कविता, व्यंग्य चिंतन, शायरी, भारत, चरित्र

दोस्त को कई रूपों में आने का हक होता-हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भतीजे को साथ लेकर आया फंदेबाज और बोला-‘‘दीपक बापू इस आवारा को भी कुछ अंतर्जाल का काम सिखा दो तीस का … more →

Tags: Blogroll, शेर-ओ-शायरी, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, bharat, शेर, अनुभूति

हमारी पोस्ट भी जोरदार पाओगे-हास्य कविता 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रास्ते में टकरा गया फंदेबाज और घूर-घूर कर देखता हूआ बोला- ‘दीपक बापू हाथ लगाकर हमसे क्या छिपा रहे हो … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, शेर, अनुभूति

समूह और वर्ग होते हैं भ्रम का प्रतीक

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:                        समाज को बांटकर विकास करने का सिद्धांत मुझे कभी नहीं सुहाता। मुझे उकताहट होती … more →

Tags: Blogroll, writing, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, bhaarat, आलेख, साहित्य

बड़ी मछली का छोटी पर शासन तो फिर भी रहा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कार्ल मार्क्स ने कहा था कि इस दुनियां को सबसे बड़ा सच रोटी है। आर्थिक ढंग से सोचने वालो ने उनकी इस ख … more →

Tags: Blogroll, vididha, दृष्टिकोण, Global Dashboard, inglish, अभिव्यक्ति, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य

शादी कर ही हमारे ब्लॉग पर कमेन्ट लगाना-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कमेंट लिखने वाले ने पूछा ‘‘ मेरी प्रेमिका और  मेरा गौत्र आधा मिलता है आधा नहीं परिवार वाले शादी के ल … more →

Tags: दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, शायरी, शेर, समाज, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, bharat

सच के परे बहस बेकार-कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: औरत पर अनाचार का प्रश्न उठता है कई बार अभी तक अनुत्तरित है एक प्रश्न कौन करता है उस पर वार दुनियां म … more →

Tags: Blogroll, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, inglish, व्यंग्य, India, bharat, yakeen

प्रतिबंध के बाद लगाये शोएब अख्तर ने फिक्सिंग के आरोप

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शोएब अख्तर पर अनुशासनहीनता के आरोप में पांच साल क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद तैं … more →

Tags: Blogroll, writing, Cricket, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, आलेख, साहित्य

यूनिकोड से कृतिदेव की तरफ जाते हुए-आलेख6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब मैं कैसे लिख रहा हूं या पहले कैसे लिखता था उसके अच्छे-बुरे को निर्णय करने का जिम्मा तो मैं कभी भी … more →

Tags: Blogroll, writing, संपादकीय, चिन्तन, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, Internet, Urdu

चोरी करना पाप है-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बचपन में जब प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे तब हमारे टीचर कहते थे कि ”चोरी करना पाप है”। … more →

Tags: arebic, चिन्तन, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिंदी आलेख, हिंदी साहित्य, bharat

सब मिल गया फिर उन्हें और क्या चाहिए-हास्य व्यंग्य 7 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह क्रिकेट खेले और विश्व कप जीतकर प्रतिष्ठा का वह इतना शिखर छू लें-जो एक आदमी के लिए दिवास्वप्न हो। … more →

Tags: Blogroll, glogbal dashborad, inglish, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, India, bharat, चिन्तन

आखिर क्रिकेट किसका खेल होने वाला है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आखिर यह क्रिकेट खेल किसका होने जा रहा है। आज भी खिलाडियों की बोली लगी जिसमें विदेशी भी शामिल थे। क्य … more →

Tags: आलेख, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, संपादकीय, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

इसलिए महिला दिवस पर कुछ नहीं लिखा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज महिला दिवस है और मैं अपने आसपास देख रहा हूँ की शायद ही कोई महिला हो जिसे यह मालुम हो और अगर माल … more →

Tags: arebic, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, शब्द, समाज, साहित्य


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