jayantijain wrote 1 week ago: प्रकृति एवं अस्तित्व की व्यवस्थाः प्राथना की आंख से देखिए इस पर एक लधु कहानी याद आती है। एक शिव मन्द … more →
jayantijain wrote 1 month ago: चाय महोत्सवः चाय पीने का आनन्द कैसे उठाए ? जीवन जीने की कला झेन मत में चाय पीने की घटना द्वारा सीखाई … more →
mypatrika wrote 5 months ago: ध्यानासन आपको भूख नहीं लगती, आपका वात, पित्त, कफ असंतुलित है और गठिया की तकलीफ है, तो आपके लिए ध्यान … more →
alakh niranjan wrote 1 year ago: बस रूक जाओ. अभी. यहीं. इसी वक्त. एक क्षण आगे नहीं. एक क्षण पीछे नहीं. इसी घड़ी में इसी क्षण में रूक … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: यह एक अद्भुद ध्यान पद्धति है. और इसके जरिए मस्तष्क से हृदय में उतरना आसान होता है. बुद्धिवादी से भाव … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: रीढ़ को सीधा करके बैठ जाईये. आंखे बंद. पूरे शरीर को ढीला छोड़ दीजिए. ध्यान रहे कमर झुकनी नहीं चाहिए. … more →