पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है, चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं, वर्ना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है, मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है, चारागरी बी … more →