जो इस शोर से ‘मीर’ रोता रहेगा तो हम-साया काहे को सोता रहेगा मैं वो रोनेवाला जहाँ से चला हूँ जिसे अब्र हर साल रोता रहेगा मुझे काम रोने से हरदम है नासिह तू कब तक मेरे मुँह को धोता रहेगा बसे … more →
The House of Hindi Poetrydevendr wrote 1 year ago: जो इस शोर से ‘मीर’ रोता रहेगा तो हम-साया काहे को सोता रहेगा मैं वो रोनेवाला जहाँ से चला … more →
devendr wrote 1 year ago: पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है लगने न दे ब … more →
devendr wrote 1 year ago: इब्तिदा-ऐ-इश्क है रोता है क्या आगे आगे देखिये होता है क्या काफिले में सुबह के इक शोर है यानी गाफिल ह … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है, चारागरी ब … more →