कैसे सुनाउ तुम्हे हाल-ए-दिल मैं ज़रा सी घबराई हूँ तुम जो खफा हो अचानक मैं ज़रा सी कतराई हूँ | जज़्बात मेरे मचल रहे है कैसे बयाँ करूँ मैं इनको तुम्हे जो मैं भेज रही हूँ कैसे सज़ाउ उस खत को | कुछ अ… more →
mehekmehhekk wrote 9 months ago: कैसे सुनाउ तुम्हे हाल-ए-दिल मैं ज़रा सी घबराई हूँ तुम जो खफा हो अचानक मैं ज़रा सी कतराई हूँ | जज … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ख़यालों में जब तुम पास नही होते या पास होकर भी दूर होते हो तेरा ही ख़याल करती हूँ मै … more →
mehhekk wrote 1 year ago: पवन बासूरी भोर की रंगों से सज़ा गगन सुनहरी रश्मि का आगमन कीलरव से चहेका चमन अंगड़ाई ले जागा मधुबन अ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना ज़रूरी होता है दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना ज़रूरी होता है … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काली घटाओं के पर्दे से झाकता है कोई अध खुले उन नयनो से ताकता है कोई | हम तो अनजान बन गुजर जात … more →
mehhekk wrote 1 year ago: शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: जानते हो तुम कितना गहरा असर होता है तुम्हारा हम पर तुम बरसते हो कही दूर और हरियाली इस पार छा जा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम वरना तो सब अधूरा यही लफ्ज़ बार बार मूड कर हमसे ज़िंदगी कहेती है | … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तेरे दर्द में सनम हम रह लेंगे इश्क़ में हुए हर सितम सह लेंगे दूर ही सही मगर दिल के करीब हो ते … more →
mehhekk wrote 1 year ago: चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ सब कुछ पाकर भी च … more →
mehhekk wrote 1 year ago: बूँद में छिपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए बूँद से मिलती आशा सब की प्रेरणा बन पाए | बूँद विश्वास की … more →
mehhekk wrote 1 year ago: एक तेरा एक मेरा खिलतें है हज़ारों गुलाब जब आते हो तुम साजन फ़िज़ायें भी बहकने लगती है कर खुशबू का रु … more →
mehhekk wrote 1 year ago: बहुत कुछ कह देते है आपको हम अपना समझ के ख़ता गर हुई कोई कभी माफ़ करना नादान समझ के लफ़्ज़ों और जज़्ब … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा | ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: गर्भ कोष की गहराई में एक बीज आकार ले रहा हौले हौले जोड़ रहा है सवेदना की पंखुड़ियों को खूबसूरत कली प … more →
mehhekk wrote 1 year ago: पहली बूँद आज इस वक़्त गर्मी से अलसाया मौसम भीग रहा है | बरसात की बूँदों ने अपना गीत छेड़ दिया | छन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नींद की लहरों में ख्वाबों के समंदर से उठ कर रौशनी की चाह जगाता हुआ चमचमाती चाँदनी शुभ्रा सा घुलता ह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: अजीब सी राहें ज़िंदगी में कितनी अजीब सी राहें शामिल है तुम भी गुज़रे उनपर हम भी चले है दुआयें माँगी … more →