बचपन की एक चोरी मुझे आज भी याद है | मैंने एक रूपया बड़ी दीदी की बॉक्स से चुराया ठा | उस समय का एक रूपया चार दिन का टिफिन के लिए होता था | हम सब दोस्त एक साथ रुपये इकठे कर के नास्ता करते थे | मुझे ए… more →
Santosh Jalansantoshjalanpink wrote 8 months ago: बचपन की एक चोरी मुझे आज भी याद है | मैंने एक रूपया बड़ी दीदी की बॉक्स से चुराया ठा | उस समय का एक … more →
विनय wrote 12 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →
विनय wrote 1 year ago: तू जाके फिर ना आयी मगर बार-बार आती रही तेरी याद सबने सुनी कहानी मेरी पर ना सुनी गयी मेरी फ़रियाद मैं … more →
विनय wrote 1 year ago: कैसी फ़रियाद, कैसा नाला हम क़ैसो-फ़रहाद नहीं हम हैं ख़ुदा से, ख़ुदा हमसे सिवाय इसके कुछ याद नहीं शायिर: … more →
विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता ह … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →
विनय wrote 1 year ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस … more →
विनय wrote 2 years ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →