मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुकसत कर दो, साथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर से, अपने माथे से हटा दो ये चमकता हुआ ताज, फेंक दो जिस्म से किरणों का सुनहरी ज़ेवर, तुम्ही तन्हा मेरा गम खाने मे आ सकती हो, एक म… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुकसत कर दो, साथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर से, अपने माथे से हटा दो ये … more →