Rakesh wrote 2 years ago: In my apartment there are hundreds of cars and there is hardly any place left for parking. Ironicall … more →
somen wrote 2 years ago: अपनी कहानी, कुछ रुहानी थोडी रुमानी, बाकी नफसानी । अपनी बातें, कु … more →
somen wrote 2 years ago: कुछ नई दीवारें एक नई छत कुछ नई खिड़कीयाँ उस साइज के न … more →
somen wrote 2 years ago: रात को सिरहाने लिए संग चंद नज़्मे और गाने लिए ज़िन्दगी क्या यूं ही गुज़रेगी सहर कब … more →
somen wrote 2 years ago: एक बात चली तो कई बात टली जब तुमने कही सब हमने सुनी कब सुबह हुई कब शाम ढली सब भूल गया जब दिल की चली । … more →
somen wrote 2 years ago: मरने के बहाने कई है एक जीने का बहाना भी तो हो उल्फत के किस्से खुब सुने अब मुकम्मल अपना फसाना भी तो ह … more →
somen wrote 2 years ago: मैं शराब नहीं पीता । ऐसे में यार दोस्तों की महफिल में मेरे होने या ना होने से ज्यादा फर्क नहीं पडता … more →
somen wrote 2 years ago: बस जीवन का दो कश लगा और खुद को ढारस आप बँधा, नाकाम हुआ तू, तो क्या शर्म यहाँ, एक हाथ थाम, एक हाथ बढा … more →
somen wrote 2 years ago: Things must have changed now, i guess. when i grew up, we were made to believe that there are only … more →
somen wrote 2 years ago: कुछ ख्वाबों को तकीए पर अकेला छोड आया हुँ, मुस्कुराते हुए स्वार्थ को बेडीयों में जकड आया हुँ बंगला गा … more →