mehhekk wrote 1 year ago: रुके थे कभी ज़िंदगी की राहो पर राह देखी थी तुम्हारी हर दिन,हर रात हर लम्हा,हर घड़ी बेसुद से खड़े रहे … more →
mehhekk wrote 1 year ago: चँदनी रात है नींबुआ के पीछे छुपा बैठा जो मध्यम मध्यम मुस्कुराता रहता वो मेरे सलोने चाँद से सजना मैं … more →