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धुँधलियाँ
धुँधलियाँ-धुँधलियाँ तेरी यादों की धुँधलियाँ छायी हैं ज़हन पर तेरी बातों की ब… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
दो हाइकू
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mehhekk wrote 5 days ago: सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से … more »
धुँधलियाँ
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विनय प्रजापति wrote 2 weeks ago: धुँधलियाँ-धुँधलियाँ तेरी यादों की धु … more »
मन पखेरू उड़ जा
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mehhekk wrote 2 weeks ago: मन पखेरू उड़ जा मन पखेरू उड़ जा लै आ … more »
वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ
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विनय प्रजापति wrote 4 weeks ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइ … more »
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more »
इक दिन तू चली जायेगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी कि इक … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार क … more »
नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more »
तेरी जगह कौन ले सकता है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तेरी जगह कौन ले सकता है मेरे जीवन में त … more »
साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: साहिबा ज़ुलेख़ा सोफ़िया आँखों में तू ख़ … more »
life is still like the past
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: i’ve tried but it doesn’t work i can’t eat food with fork life is still like the p … more »
खिले इस तरह तेरे रंग और रूप
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दि … more »
इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा कभी ते … more »
दर्द की तहरीरें
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विनय प्रजापति wrote 7 months ago: मैं जो तुम्हें देखता हूँ मुझको देखती ह … more »
दोस्त, माफ़ कर देना मुझे
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तुमने पुकारा था जब मैंने सुना तो था मग … more »
मैं खु़द को दो बाँहों में भरकर
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: तुम्हें देखता हूँ तो तुम्हारी मासूम ह … more »
