जिन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं, इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं, सच घटे या बडे तो सच न रहे, झूठ की कोई इन्तेहा ही नहीं, जड़ दो चांदी में चाह… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: जिन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं, इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं, मेरे हिस … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिश्ता क्या है तेरा मेरा, मैं हूँ शब और तू है सवेरा, तू है चाँद सितारों जैसा, मेरी किस्मत घोर अँधेरा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मैं न हिंदू न मुसलमान मुझे जीने दो, दोस्ती है मेरा इमान मुझे जीने दो, कोई एहसान न करो मुझपे तो एहसान … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: एक बराह्मण ने कहा कि ये साल अच्छा है ज़ुल्म की रात बहुत जल्द टलेगी अब तो आग चुल्हों में हर इक रोज़ ज … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं, रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं। पहले हर चीज़ थी अपनी … more →