फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है, सीना ज़ोया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है, फिर जिगर खोदने लगा नाख़ून, आमद-ए-फ़स्ल-ए-लालाकारी है, फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं, फिर वही ज़िंदगी हमारी है, बेख़ुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: माडल टाउन के आर्य समाज मंदिर में एक छोटे से हाल में श्रद्धांजलि देने वाले कुछ खास लोग शामिल हुए। उन् … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है, सीना ज़ोया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है, फिर जिगर खोदने लगा नाख़ून, आमद-ए-फ़स्ल-ए-ला … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: कब से हूँ क्या बताऊं जहान-ए-ख़राब में, शब हाय हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में, ता फिर ना इंतज़ार में नी … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मेहरबां हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त, मै गया वक़्त नहीं हूं के फिर आ भी ना सकूं, ज़ौफ़ में ता नये … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना, की मेरे क़त्ल के बाद उस ने … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है? तुम ही कहो कि ये अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है? रगों में दौड़ते … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है? हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद जो नहीं जानते … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बे … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता। तेरे वादे पर जिए हम तो … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है। देखिए पाते हैं उशशाक़ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे। होता है निहाँ गर्द में सहरा … more →
Jaya wrote 2 years ago: Lyrics: Mirza Ghalib Singer: Jagjit Singh बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ त … more →
Jaya wrote 2 years ago: Lyrics: Mirza Ghalib Singer: Jagjit Singh उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक वो समझते हैं कि बीम … more →
Jaya wrote 3 years ago: Lyricist: Mirza GhalibSinger: Jagjeet Singh आह को चाहिए इक उम्र असर होने तककौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ … more →